हमारे पिता

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हमारे पिता का कोई ऐसा दोस्त नही की जो अमरीश पुरी की तरह आये और कहे कि “चल मेरे दोस्त हमारी दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलदे”

पन आमच्या बापाचे मित्र कधी भेटों एकच सांगतात

“तुझ पोरगा लय  जोरात गाडी चालावतो…”😝😝

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